
सारांश




सोयबीन या सोयाबीन मूल रूप से पूर्वी एशिया में पाई जाने वाली फली वाली दलहन है. इसे आमतौर पर शाकाहारी लोग प्रोटीन की कमी पूरी करने के लिए मांस की जगह इस्तेमाल करते हैं. इसमें सभी 9 अमीनो एसिड होते हैं इसलिए यह प्रोटीन से भरपूर होती है. सोयाबीन कई रूपों में उपलब्ध होती है और इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स के साथ फायटोन्यूट्रीएंट्स होते हैं. इनसे सेहत से जुड़े कई फायदे मिलते हैं. हालांकि, इसके साइड इफेक्ट को लेकर भी चिंता व्यक्त की जाती है. गर्भावस्था में सोयाबीन खाना- अच्छा है या बुरा.
जी हां, गर्भावस्था में सोयाबीन खाना सुरक्षित है अगर इसे संयमित मात्रा में खाया जाए. सोया बीन कई प्रकार के होते हैं. हर किसी के अपने फायदे और नुकसान हैं, इनमें सोया चंक भी शामिल हैं. क्या सोया चंक गर्भवती महिलाओं के लिए अच्छा है? गर्भावस्था के दौरान सोया चंक, प्रोटीन के अच्छे स्रोत साबित होते हैं लेकिन इसमें आइसोफ्लेवोनीज बहुत ज्यादा मात्रा में होता है जो एस्ट्रोजन स्तर को बढ़ाने का काम करता है. इसलिए, गर्भावस्था में सोया चंक जरूरत से ज्यादा मात्रा में खाना सेहत के लिए अच्छा नहीं है. टोफू में चंक से भी ज्यादा एंटीऑक्सीडेंट होते हैं लेकिन टोफू की ज्यादा मात्रा खाने से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा होता है. सोया मिल्क में टोफू के मुकाबले कैलोरी की मात्रा कम होत है लेकिन इसकी ज्यादा मात्रा बदहजमी का कारण बन सकती है. गर्भावस्था में सोयाबीन खाना सुरक्षित है लेकिन शर्त यह है कि इसे अच्छी तरह से पकाया गया हो और संयमित तरीके से खाया जाए.
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सोयाबीन में प्रोटीन मुख्य रूप से पाया जाता है. इसमें दूसरे पोषक तत्व भी होते हैं. वे क्या हैं?
100 ग्राम उबले हुए सोयाबीन की पोषण वैल्यू आगे बताई गई हैः
गर्भावस्था में सोयाबीन खाने के कई सारे फायदे हैं.
यह प्रोटीन का अच्छा स्रोत है, यह होने वाले बच्चे के दिमाग के साथ-साथ पूरे शरीर की ग्रोथ में मदद करता है. इतना ही नहीं, यह बच्चे को ऑक्सीजन और ब्लड सप्लाय बेहतर करने में मदद करता है.
ओमेगा-3 फैटी एसिड महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि ये बच्चे के दिमाग और रेटीना के लिए बिल्डिंग ब्लॉक का काम करते हैं.
फाइबर की वजह से डाइजेशन बेहतर होता है.
सोयाबीन में पाए जाने वाले मिनरल में सेहत से जुड़े ढेर सारे फायदे मिलते हैं और भ्रूण को पोषण देते हैं.
कार्बोहाइड्रेट से एनर्जी का स्तर बढ़ता है.
फॉलेट और जिंक की वजह से बच्चे में जन्मजात बीमारियां नहीं होती.
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सोयाबीन में पाया जाने वाला आइसोफ्लेवोन्स असल में फायटोएस्ट्रोजन होते हैं और इनमें वही गुण होते हैं जो इंसानो में मिलने वाले एस्ट्रोजन में मिलते है. गर्भावस्था में सयबीन की ज्यादा मात्रा खाने से बच्चे की ग्रोथ पर असर पड़ता है.
इसमें फाइटिक एसिड भी होता है जो कि नुकसान पहुंचाने वाली धातुओं को शरीर में सोखने से रोकता है जैसे कि लेड और पारा. हालांकि, यह शरीर में मिनरल्स जैसे मैग्नेशियम, कैल्शियम, आइरन और जिंक के सोखने पर भी रोक लगा सकता है. गर्भावस्था में यह सभी मिनरल्स जरूरी होते हैं और भ्रूण की ग्रोथ में मदद करते हैं.
सोयाबीन में पेस्टिसाइड की मौजूदगी की वजह से हार्मोनल का स्तर गड़ब़ड़ा सकता है जो कि गर्भावस्था में नुकसानदायक हो सकता है. इसलिए, इन्हें पकाने से पहले अच्छी तरह से धो लेना चाहिए.
सोयाबीन शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर बढ़ाते हैं इसलिए इनसे कैंसर, खासतौर पर ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा रहता है.
गर्भावस्था में सोया चंक को लेकर कोई निष्कर्ष देने वाली स्टडी सामने नहीं आए हैं. कुछ स्टडी जानवरों और चूहों पर किए गए हैं. हालांकि, स्टडी को लेकर यहां रिपोर्ट दी गई हैं:
गर्भवती महिलाओं के लिए सोयाबीन की कोई मात्रा तय नहीं है. हालांकि, विशेषज्ञ गर्भावस्था में एक कम सोया मिल्क या आधा कप टोफू या आधा कप सोया चंक या आधा कप सोयाबीन खाने की सलाह देते हैं. अगर आप बताई गई मात्रा से ज्यादा सोयाबीन खाती हैं तो इसके साइड इफेक्ट हो सकते हैं. यह बेहतर होगा कि गर्भावस्था में आप कितना सोयाबीन खा सकती हैं यह जानने के लिए अपने डॉक्टर से कंसल्ट कर लें.
1. Pang X, Cai C, Dong H, Lan X, Zhang Y, Bai D, Hao L, Sun H, Li F, Zeng G. (2022). Soy foods and nuts consumption during early pregnancy are associated with decreased risk of gestational diabetes mellitus: a prospective cohort study. J Matern Fetal Neonatal Med.
2. Miyake Y, Tanaka K, Okubo H, Sasaki S, Tokinobu A, Arakawa M. (2021). Maternal consumption of soy and isoflavones during pregnancy and risk of childhood behavioural problems: the Kyushu Okinawa Maternal and Child Health Study. Int J Food Sci Nutr.
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